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ग्वालियर – ईको डायजेस्टर से टॉयलेट का पानी शुद्ध करके हो रही है बागवानी “कहानी सच्ची है”

ग्वालियर - ईको डायजेस्टर
ग्वालियर – ईको डायजेस्टर

ग्वालियर – पानी की कमी को देखते हुए पानी की बचत और पानी का पुन: उपयोग करने की आवश्यकता अब हर व्यक्ति को महसूस होने लगी है। पानी अमूल्य है। यह बताना अब जरूरी नहीं है। हर कोई इस बात को समझने लगा है। ग्वालियर – ईको डायजेस्टर में पानी की बचत और पर्यावरण सुधार के लिए 25 सामुदायिक शौचालयों में नवीन वैज्ञानिक तरीके से तैयार बायोडायजेस्टर लगाने की पहल की गई है।
बायो टॉयलेट के उपयोग से हानि रहित विषाणु रहित परम जैविक खाद के रूप में एफ्लुयेंट जिसका उपयोग किचन गार्डन, बागवानी और पेड़-पौधों के लिये उपयोगी होता है। बायोडायजेस्टर युक्त टॉयलेट के बहुत लाभ होते हैं। टॉयलेट के संधारण से मुक्ति मिलती है, एफ्लुयेंट पानी का पुनः उपयोग हो सकता है, जिसमें लेक्टिरिया 99 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं। पानी की बचत होती है तथा यह प्रयोग पर्यावरण के लिए बहुत ही अच्छा है और बहुत ही कम लागत में तैयार हो जाता है। इसका उपयोग कहीं भी किया जा सकता है तथा इससे भूजल की गुणवत्ता भी प्रदूषित नहीं होती है। नगर निगम द्वारा किए जा रहे इस प्रकार के नवाचारों से जहां पर्यावरण का संरक्षण होता है, वहीं पानी की बचत होती है और पुनःउपयोग होता है तथा जैविक खाद भी प्राप्त होती है।
जल संकट आज ग्वालियर में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में गहराया हुआ है, यदि हम आज भी सचेत नहीं हुए तो आने वाले समय में पानी की लडाई होना स्वाभाविक है। पानी के संकट का केवल एक ही विकल्प है, जल संरक्षण, जल का रीयूज एवं जल स्रोतों को रीचार्ज करना। जल समस्या के दौर से गुजर रहे ग्वालियर शहर में नगर निगम द्वारा अनेक नवाचार अपनाए जा रहे हैं, जिसमें उपयोग करने के बाद जल का पुनः उपयोग करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
पर्यावरण सुधार के उपाय के लिए नगर निगम ग्वालियर द्वारा 25 सामुदायिक शौचालयों में नवीन वैज्ञानिक तकनीक से तैयार बायोडायजेस्टर लगाए गए हैं। बायो टॉयलेट के उपयोग से हानिरहित, विषाणु रहित, तरल जैविक खाद के रुप में एफ्लुयेंट निकलता है जिसका उपयोग किचन गार्डन, बागवानी, पेडपौधों के लिए उपयोगी है। बायो टॉयलेट से निकलने वाला पानी बदबू रहित होकर आसानी से पुनः उपयोग लायक बन जाता है।
नगर निगम आयुक्त श्री विनोद शर्मा का कहना है कि ग्वालियर में प्रथम चरण में 25 सामुदायिक शौचालयों में इसका प्रयोग किया गया है। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आए हैं। निगम द्वारा अन्य सामुदायिक शौचालयों में भी इस प्रकार का प्रयोग किया जायेगा।

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