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लोकतांत्रिक संस्थाओं को आइना दिखाने का काम मीडिया करता है – कमिश्नर श्री रूपला

लोकतांत्रिक संस्थाओं को आइना दिखाने का काम मीडिया करता है – कमिश्नर श्री रूपला
लोकतांत्रिक संस्थाओं को आइना दिखाने का काम मीडिया करता है – कमिश्नर श्री रूपला
मीडिया संवाद कार्यशाला: लोकतंत्र में सर्वोच्च सत्ता जनता में नीहित – वरिष्ठ पत्रकार श्री कुशवाह
ग्वालियर- लोकतंत्र के तीनों स्तम्‍भों को आइना दिखाने का काम मीडिया के द्वारा किया जाता है। इसके आधार पर ही यह संस्थायें अपनी रीति और नीति का निर्धारण करती हैं। इसलिये आवश्यक है कि मीडिया समाज के हर वर्ग के साथ जीवंत संवाद स्थापित रखें। यह बात संभाग आयुक्त श्री एस एन रूपला ने जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित मीडिया संवाद कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में कही।
होटल आदित्याज में आयोजित इस कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार श्री रामभुवन सिंह कुशवाह और श्री सुरेश शर्मा, स्थानीय नईदुनिया के संपादक श्री अजीत सिंह वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेन्द्र श्रीवास्तव सहित मीडिया क्षेत्र के सभी पत्रकारगण उपस्थित थे।
श्री रूपला ने कहा कि लोकतंत्र में कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका आपस में शक्ति संतुलन का कार्य करती हैं। इन तीनों संस्थाओं के मार्गदर्शन का काम मीडिया के द्वारा किया जाता है। इसीलिये मीडिया की पहचान लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप में की गई है या फिर हम सहज शब्दों में यह कहें कि मीडिया एक प्रकाश स्तम्भ है जो इनके मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है। श्री रूपला ने कहा कि मीडिया की सशक्त भूमिका के लिये आवश्यक है कि वह आमजन के साथ “संवाद” कायम रखे। संवाद व्यक्ति से व्यक्ति को जोड़ने का माध्यम है। क्योंकि संवाद हमारी जीवन शैली का अभिन्न अंग है। जहाँ संवाद नहीं होता वहाँ मतभेद की स्थिति निर्मित होती है जो किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है। उन्होंने स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिये सभी वर्गों के बीच में निरंतर संवाद बनाए रखने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार श्री रामभुवन सिंह कुशवाह ने कहा कि निर्भीक और निष्पक्ष लोकतंत्र के लिये संवाद आवश्यक है। भारत में लोकतंत्र की स्थापना प्राचीनकाल से मानी जाती है। लेकिन वर्तमान स्वरूप को हम पश्चिम की देन मान सकते हैं। देश की संवैधानिक व्यवस्था का मूल आधार 1935 के इंडियन एक्ट को माना जाता है। जिसमें जनता और व्यवस्था के सभी नियम कायदों को लिपीबद्ध किया गया है, जबकि इंग्लैण्ड में अलिखित संवैधानिक व्यवस्था प्रचलन में है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत वर्ष दुनिया की सबसे सशक्त लोकतांत्रिक व्यवस्था वाला देश है जहाँ सर्वोच्च सत्ता जनता में नीहित है। पत्रकारिता इस सर्वोच्च सत्ता के अधिकारों के प्रति लगातार आवाज उठाने का काम कर रही है। उन्होंने मध्यप्रदेश में पत्रकारिता के प्रेरणा स्त्रोत स्व. श्री माणिकचंद वाजपेयी (मामाजी) का भी स्मरण किया और कहा कि उन जैसे मूर्धन्य व्यक्तित्व के कारण मध्यप्रदेश में सशक्त पत्रकारिता विकसित हुई है।
इससे पूर्व भोपाल से आए वरिष्ठ पत्रकार श्री सुरेश शर्मा ने कहा कि आज के दौर में पत्रकारिता का काम केवल व्यवस्थाओं और संस्थाओं को आइना दिखाने के साथ-साथ विकासोन्मुख पत्रकारिता का दौर है। सूचना संचार के इस युग में पत्रकारों को अपडेट रहने की आवश्यकता है। बेहतर रिपोर्टिंग के लिये आवश्यक है कि वह विषय के बारे में गहराई से समझें, फिर लेखन करें। उन्होंने कहा कि आज का दौर पत्रकारिता के युग में परिवर्तन का दौर है। पत्रकारिता डेस्क तक सिमट कर रह गई है। पत्रकारों के सोर्स कम हो रहे हैं। उसका मूल कारण पत्रकारों का आमजन के साथ संवादहीनता की स्थिति है। उन्होंने युवा पत्रकारों को अपने ज्ञान के विस्तार के साथ विश्वसनीय स्त्रोत विकसित करने की सलाह भी दी।
नईदुनिया के संपादक श्री अजीत सिंह ने कहा कि मीडिया की भूमिका समाज के हितों के प्रहरी के रूप में है। मीडिया का काम समाज को जागरूक बनाने के साथ-साथ संवैधानिक संस्थाओं को उनकी कथनी और करनी के लिये आइना दिखाना है। उन्होंने कहा कि आज के सामाजिक परिवर्तनों के दौर से पत्रकारिता अछूती नहीं रह सकती। नवीन तकनीक विकसित हो रही है। संचार के नए माध्यम आ रहे हैं। इस दौर में पत्रकार को अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिये अपडेट रहने की आवश्यकता है। श्री सिंह ने नवीन पत्रकार युवाओं में अध्ययन करने की प्रवृत्ति कम होते जाने पर चिंता व्यक्तत की और कहा कि अध्ययन हमारी गुणवत्ता को बढ़ाता है। इस पर युवाओं को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
इसके पूर्व वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेन्द्र श्रीवास्तव ने अपने अनुभवों में बताया कि गत 30 और 35 वर्षों की पत्रकारिता के दौर में अनेक बदलाव आए हैं। आज पत्रकारिता गुरू-शिष्य परंपरा से निकलकर गूगल गुरू की शरण में पहुँच गई है। उन्होंने युवा पत्रकारों से अपने वरिष्ठजनों के साथ जीवंत संवाद बनाए रखने की सलाह दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथिगण द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन पीआरओ श्री हितेन्द्र सिंह भदौरिया ने किया। संयुक्त संचालक जनसंपर्क श्री डी डी शाक्यवार ने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों और सहभागियों के प्रति आभार ज्ञापित किया।

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